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1 दिन सागर ने सरिता से पूछा तुम इतने वेग से बहती हुई मेरे पास तक आती हो और उस रास्ते में जिस से चलकर आती हो बहुत से वृक्ष उखड़ जाते हैं,

यहां तक कि पत्थर तक लुढ़क कर कहीं से कहीं पहुंच जाते हैं परंतु मार्ग के यह छोटे छोटे से पौधे वह भेजें तुम्हारे शक्तिशाली वेग में भी वैसे ही अपने स्थान पर बने रहते हैं

इसका क्या कारण है समझ में नहीं आता,

सागर का प्रश्न जब सरिता ने सुना तो वह बोली मेरे रास्ते में जो पेड़ ऐड कर खड़े रहते हैं वे तो पानी के वेग से उखड़ जाते हैं,

अहंकार से भरी पत्थर तक लुढ़क कर बह जाते हैं परंतु पानी का भाव जब तेज होता है तो यह बेल्ले में छोटी-छोटी घास झुक जाती हैं और पानी को रास्ता दे देती हैं

यही कारण है कि वह बच जाती हैं रास्ते में उनसे मुझे कोई रुकावट नहीं होती इस कारण मेरी उनसे कोई लड़ाई और संघर्ष भी नहीं होता,

वैसे ही नंबर व्यक्ति को पहचान कर उसका कोई विरोध नहीं करता विनम्र व्यक्ति की हमेशा जीत होती है।

इस कहानी से यह सीखने को मिलता है कि इंसान अपने स्वभाव में विनम्रता का गुण रखता है तो इस संसार में सदैव उसकी जीत होती है और जो इंसान अकड़ और अहंकार में रहते हैं वह हमेशा संघर्ष ही करते हैं और हारते हैं जीवन में अशांति प्राप्त होती है