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आओ मिलकर करें ऐसी प्रकृति की संरचना
हर कली प्रेम से मुस्कुराने लगे।

विश्व में स्नेहा सौहार्द का राज्य हो,

हर हृदय प्रेम के गीत गाने लगे।

हर तरफ प्रेम की भावना हो सबके दिलों में,

हर डाल में कलियां खेलने लगे।

भैंस ओक्का अब नहीं नाम हो,

प्रीति की गंध गलियों में उड़ने लगे।

मधुमास के रंग में धरती रंगे,

सूची अपनत्व से जग जगमग आने लगे।

विश्व में इसने सौहार्द का राज्य हो हर हृदय प्रेम के गीत गाने लगे।

प्यार सहकार की भावनाएं बड़े,

विश्व बंधुत्व का भाव बढ़ने लगे,

रंग मिलाने लगे प्रज्ञा की भावना,

रंग बसंती उमंगों को भरने लगे।

धरती सारी बसंती भरे भावना, मधुमेह ईश्वर सुनाने लगे

प्रकृति मधुमेह ईश्वर सुनाने लगे,

विश्व में इसने सौहार्द का राज्य हो,

हृदय प्रेम के गीत गाने लगे।

स्वर्ग आए उत्तर रंग बसंती लिए,

हरवीर देगा उठे प्रेम की वंदना,

हर ह्रदय हो भरा प्रीति की raag से,

आओ मिल्कर करेन ऐसी शुभ सजना

यह धरा खुशी खुशी मुस्कुराने लगे,

विश्व मनोज देवत्व और का जगाने लगे,

विश्व में इसने सौहार्द का राज्य हो,

हरदिल प्रेम के गीत गाने लगे,

आओ करें ऐसी प्रकृति की संरचना।

Edit by ललित कुमार सैनी