घोड़े का सौदा

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अपने गधे की लगाम था मैं म***** नसरुद्दीन आगे बढ़ा जा रहा था दोपहर का दूसरा पहर गुजर चुका था गर्मी की की याद आती की वजह से चारों तरफ सन्नाटा था धूल भरी गुब्बार उड़ रही थी

मुला पसीने से तरबतर आगे बढ़ा जा रहा था बाजार से गुजरते हुए उसने जानी पहचानी सड़कों को देखा कहवा चाय की दुकानों व मीनारों को पहचाना आठ 10 वर्षों के बाद भी कुछ चीजें जो कि जो ही थी हमेशा की तरह तालाब के किनारों पर मरियल कुत्ते आज भी सो रहे थे

म***** नसरुद्दीन वही तालाब के किनारे एक पत्थर पर बैठ गया बगल में ही चाय खाना था उसने आंटी में से थैली निकाली अब वह बिल्कुल खाली थी गधे को उसने चढ़ने के लिए एक और छोड़ दिया था

खुशी से मुखातिब होकर वह बड़बड़ आया बेटे थैली बिल्कुल खाली है सत्यानाश हो टैक्स अफसर का सारी रकम निखिल वाली वरना सामने वाली चाय की दुकान से एक चाय ही पी लेते लेकिन खैर कोई बात नहीं खुदा भला करेगा कोई युक्ति लड़ाते हैं

तभी उसकी नजर उस व्यक्ति पर पड़ी जो उसकी कंगाली का कारण था यह वही कर अधिकारी था जो घोड़े पर चढ़ा चाय की दुकान की ओर आ रहा था दो सिपाहियों ने उसके घोड़े की लगाम पकड़ी हुई थी और धीरे-धीरे घोड़े के साथ भाग रहे थे

सिपाहियों ने चाय की दुकान के बाहर बड़े सम्मान से अपने अधिकारी को उतारा गया मोटा थॉन्ड्यिल दुकान में चला गया दुकान के मालिक ने उसे बाहर से ही लपक लिया इससे नहीं फोड़ते हुए वह उसे अंदर ले गया और सम्मान पूर्वक रेशमी गधे पर बैठाया

फिर उसने बेहतरीन चाय का प्याला उसकी खिदमत में पेश किया बाहर तालाब के किनारे बैठा मुला नसरुदीन यह सब देख रहा था उसका इतना आदर सम्मान होते देख देख कर म***** के सीने पर सांप लोट रहे थे वह गुदगुदाया खेत देखो तो मेरी कमाई किस ऐसे उड़ा रहा है

अधिकारी ने सड़क छोड़कर जाएगी फिर वही गद्दे पर लुढ़क गया जल्दी ही उसके खर्राटों की आवाज चाय खाने में गूंजने लगी कभी-कभी उसके होंठ चटनी और हालत से गिरकर की आवाज भी सुनाई देने लगी थी

मेहमानों ने इस ख्याल से धीरे धीरे बोलना शुरू कर दिया कि कहीं कर अधिकारी की नींद ना खुल जाए पहरेदार उसके अगल-बगल बैठकर पत्तों से उसकी मक्खियां उड़ा रहे थे कुछ देर बाद जब अधिकारी गहरी निद्रा में सो गया तो दोनों ने आंखों ही आंखों में कुछ इशारा किया फिर उठ कर बाहर आ गए

घोड़े के आगे गाल डाली हो नारियल की पेंदी का ₹1 लेकर दुकान के बगल में ही गाड़ियों से गिरे को सुनसान और अंधकार थ्रोंस थान में चले गए कुछ देर बाद ही मुलाने हवा में गांजे की महक तैरती महसूस की कुछ ही देर में पहरेदार मदहोश हो चुके थे

सुबह शहर में फाटक पर घटी घटनाओं के मद्देनजर म***** नसरुद्दीन ने सोचा कि कहीं पहरेदार उसे पहचान वाले अब यहां से खिसक लेने में ही भलाई है बेटा नसरुद्दीन पेट भरने के लिए आधा तंका कहां से आएगा उसने सोचा फिर आसमान की ओर चेहरा उठाकर बड़बड़ आया या खुदा मदद कर तूने न जाने कितनी बार म***** नसरुद्दीन की मदद की है ए मेरे परवरदिगार आज फिर मूला नसरुद्दीन पर रहमत की नजर कर।

अरे सुन तभी किसी ने उसे पुकारा मुलाने पलट कर देखा एक सजी-धजी घोड़ा गाड़ी उसके सामने खड़ी है एक आदमी कीमती साफा और कीमती कपड़े पहने गाड़ी की खिड़की से झांक रहा है उसे देखकर मुल्लाह समझ गया कि अल्लाह ने उसकी सुन ली है और कोई खुदाई मददगार आ पहुंचा है

जब भी उसका इस अजनबी ने सिर से पांव तक उसे देखते हुए बड़े हो आप से कहा मुझे यह घोड़ा पसंद है बोल क्या यह बिकाऊ है

उसका इशारा नसरुद्दीन से चार कदम की दूरी पर चल रहे कर अधिकारी के घोड़े की तरफ था मुलाका कथा उसे कुछ ही दूरी पर था ऐसा लगता था जैसे उस अरबी और सफलता चमकीली आंखों वाले उस घोड़े का मालिक म***** नसरुद्दीन हीरो आस पास कोई दूसरा था भी नहीं

गुलाबी सारी स्थिति को समझ गया और बात बनाते हुए बोला दुनिया में ऐसा कौन सा घोड़ा है जो बिक नहीं सकता अजनबी रईस उत्साह से भर कर पुनः बोला सुनो दोस्त शायद तुम्हारी जेब बिल्कुल खाली है इसलिए मेरी बात ध्यान से सुनो मैं यह नहीं जानना चाहता कि यह घोड़ा किस का है या तुम्हारे पास कहां से आया या पहले इसका मालिक कौन था मुझे कुछ नहीं जानना है तुम्हारे कपड़ों पर खड़ी कर दे लगता है कि तुम कहीं बहुत दूर से आ रहे हो मेरे लिए यही काफी है तुम मेरी बात समझ रहे हो ना

मुला नसरुदीन मुंह से कुछ नहीं बोला उसने केवल सिर हिला दिया वह फौरन समझ गया कि अमीर क्या कहना चाहता है वह इससे भी आगे की बात समझ गया कि अब क्या होने वाला है अब तो उसने तहे दिल से यह दुआ करनी शुरू कर दी कि कोई गुस्ताख मुट्ठी अंदर शोर रहे कर अधिकारी की नाक मुंह पर जुल्म ना कर भी उसे जगाना दे वरना सारा खेल ही बिगड़ जाएगा

सरदारों की तो उसे कोई अधिक फिक्र ही नहीं क्योंकि गांजे की महक हवा में अभी तक भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थी जिससे जाहिर था कि वे दोनों नशे में धुत पढ़े होंगे अपनी समझ के अनुसार अमीर बड़े ही काबिल लाना अंदाज में धीरे-धीरे उसे लाइन पर ला रहा था वह अपनी बात बड़ी ही गंभीरता से कह रहा था तथा अपनी बात कहने का अंदाज भी बड़ा दर्शनी को जैसा था

तुम्हें यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि फटे पुराने चिथड़े पहनकर ऐसे शानदार घोड़े पर चढ़ना तुम्हें शोभा नहीं देता मत भूलो कि यह बात तुम्हारी लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है क्योंकि कोई भी इस बात पर शक सुबह कर सकता है कि इस भिखारी के पास आखिर इतना बढ़िया घोड़ा कहां से आया तुम मेरी बात समझ रहे हो ना

मुला नसरुदीन की आंखों में उसके लिए प्रशंसा के भाव दिखाई देने लगे और वह स्वीकारने वाले अंदाज में जल्दी-जल्दी सीरियल आने लगा मानो कहना चाहता हूं कि वह मेरे आका यह तो तुमने बड़े पते की बात कही अपनी बात का रंग चढ़ते देखा था मैंने उसे कुछ खूब जमा करने की नियत से कहा बढ़ खुदा ने इस बात की भी बड़ी गुंजाइश है

कि तुम्हें कैद में डाल दिया जाए मुला नसरुदीन का सिर स्वीकारने वाले अंदाज में जल्दी-जल्दी इला अपनी आंखों में भी उसने को जुदा होने के भाव पैदा कर लिए फिर बड़े अदब से वह बोला आप दुरस्त फरमाते हैं मेरे आका चश्मा चावड़ा मेरे जैसों की औकात से कहीं बाहर की चीज है मेरी है फटी पुरानी और भीख मांगो जैसी पहुंचा तो किसी गधे पर ही चलने के काबिल है मुझे तो ऐसे शानदार अरबी घोड़े पर सवारी करने की बात तो सपने में भी नहीं सोच नहीं चाहिए

मुला नसरुदीन का जो आप सुन कर रहे इस बड़ा खुश हुआ वह थोड़ा और गुरु से बोला अलार्म कि तुम काफी करीब हो मगर मुझे खुशी है कि गुरु ने तुम्हें अदा नहीं किया ना चीज गरीब को नरमा ही अच्छी लगती है ऐ मुसाफिर सुंदर फूल बदाम के शानदार दरकत पर ही शोभा पाते हैं ना की किसी कटीली झाड़ी पर यदि तुम्हें ऐसी चाहिए तो बताओ उसने एक थैली निकालकर नशरुदीन को दिखाते हुए खनकाई इसमें पूरे 300 तक के हैं

300 तक के धमाका सा हुआ म***** नसरुद्दीन के जेहन में दो चक्का साफ करवाए एकदम से चिल्लाया चाहिए चाहिए उसके रेट बढ़ाने और चिल्लाने का कारण यही था कि एक पुस्तक मक्खी अंदर कर अधिकारी की नाक पर भिन्न-भिन्न आई थी जिस कारण वह बहुत जोर से सीकर गुनगुनाना था और उसकी चीन की आवाज नसरुद्दीन को बाहर साफ-साफ सुनाई दी थी कहीं मौका हाथ से ना निकल जाए यही सोचकर वह जल्दी से बोला चाहिए मैं समझता हूं कि इस समय मुझे किसी घोड़े की नहीं बल्कि इसकी सख्त जरूरत है चांदी के 300 सिक्के लेने से भला कौन इनकार कर सकता है मेरे आका अरे यह तो ठीक है सही है जैसे किसी को सड़क पर पड़ी तो चेली मिल

अमीर एशियन राज में मुस्कुराए मानो उसने कोई बड़ी बाजी जीत ली हो बोला लगता है तुम्हें सड़क पर कोई दूसरी ही चीज मिली है लेकिन मैं इस रकम से उस चीज को बदलने को तैयार हूं जो तुम्हें सड़क पर मिली है यह लो 300 तक कि उस चीज के बदले अब यह तुम्हारे हुए मुला नसरुदीन एथेली ले लिया मैंने अपने चेचक के दाग से भरे चेहरे वाले नौकर की तरफ देखा वह बग्गी के घोड़े के पास खड़ा चाबुक से अपनी पीठ खुजला रहा था उसका चेहरा खुरदरा और पत्थर की तरह कठोर था तथा आंखों में मक्कारी भरी चमक चाहिए

मक्कारी में हुआ किसी भी सूरत में अपने मालिक से कम दिखाई नहीं दे रहा था अपने मालिक का इशारा पाकर भरकर अधिकारी के घोड़े की ओर बढ़ने लगा अपने मालिक और नसरुद्दीन के बीच हुआ पूरा वार्तालाप बस उन्हीं चुका था उस घोड़े की और बढ़ते देखकर मुला नसरुदीन के दिमाग में खतरे की घंटी बज उठी उसने फोन फैसला कर लिया कि तीन मकानों को एक साथ एक ही सड़क पर नहीं होना चाहिए अतः उसने अमीर की नेक नियति और हम दिल्ली का कसीदा पड़ा और अपने गधे पर सवार हो गया फिर उसने गधे को एसी ऐड लगाई कि वह सुस्त और आलसी साकड़ा फोन कमान से निकले तीर की भांति सरपट दौड़ दिया

करीब 1 फर्लांग दूर जाकर मुला नसरुदीन ने पलट कर देखा दूर दर्रे चेहरे वाला सेवक घोड़े को अपनी गाड़ी से बांध रहा था करीब आधा फर्लांग दूर जाकर वह फिर पलटा तो वहां नजारा एक दूसरा था उसने देखा कि कर अधिकारी और रहीस आपस में घुसते हुए हैं आपस में एक दूसरे की गाड़ियां पकड़ पकड़ कर नाच रहे हैं चाय खाने में बैठे तमाम तमाम ग्राहक बाहर आकर तमाशबीन बन चुके थे।

दोस्तों इस कहानी में बार-बार एक तो बुखार आ का नाम आ रहा है यह कोई बीमारी नहीं है यह म***** नसरुद्दीन के गांव का नाम है बुखारा और एक तन के का जिक्र भी बार-बार हो रहा है तन के का मतलब पैसा होता है उस समय पैसों को तंग के बोलते थे।

गधा और गधे के रिश्तेदार पार्ट सेकंड

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म***** नसरुद्दीन का गधा भी अलग किसम का था मालिक ना भी कहे तब भी वह हालात को देखकर अपनी चाल बदल लेता था

उसके लंबे और सतर्क कानूनी फाटक से आती चिल्को और कर अधिकारी की बकराहट सुन ली थी जो अपने सिपाहियों को उस शैतान को पकड़ लाने का आदेश दे रहा था,

जाओ जल्दी जाओ पकड़ कर लाओ उसका फिर को आखिर वह है कौन,

हवा में तैरती इन आवाजों ने म***** नसरुद्दीन के गधे के पैरों में से जैसे बिजली भर्ती हो वह किसी की भी परवाह किए बिना भागा जा रहा था वह इतनी तेजी से भाग रहा था कि मुला नसरुदीन को भी अपने पांव पर उठाने पढ़ रहे थे।

वह तो बिल्कुल गधे की पीठ पर पड़ी जिनसे चिपक गया था उसकी बाद में गधे की गर्दन से लिपटी हुई थी यह देखकर गली के कुत्ते डर और घबराहट के मारे भोंकने लगे कि या अल्लाह यह क्या बवाल आ गया,

गली में घूमते सुकते मुर्गे मुर्गियां और उनके चूजे डर कर इधर-उधर भाग रहे थे राहगीर अचरज से दीवारों के साथ सट कर खड़े हो गए थे कोई समझ नहीं पा रहा था कि क्या मुसीबत है किसी भी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था।

उधर को छिपा ही उसकी खोज में इधर-उधर निकल पड़े थे कर अधिकारी अभी तक क्रोध से थरथरा रहा था उसकी आंखें लाल हो गई थी और नथुने फड़फड़ा रहे थे एक आशंका फॉर्म्स की तरह उसके हलक में फंसी हुई थी।

वह आजाद खयालात वाला निडर आदमी कहीं म***** नसरुद्दीन तो नहीं था आखिर ऐसी बेबाक बात बोला नसरुद्दीन के सिवाय और कहीं कौन सकता था

उधर लोग भी आपस में कुशल कुशल करने लगे थे यह जो आप तो म***** नसरुद्दीन के ही योग्य था दोपहर होते-होते यह चर्चा पूरे शहर में पहुंच चुकी थी कि एक व्यक्ति ने द्वार पर ऐसी बात कही,

जिसने भी सुना उसने यही कहा ऐसा जवाब तो म***** नसरुद्दीन ही दे सकता है।

गधा और गधे के रिश्तेदार

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बुखारा में दाखिल होते समय व्यापार के लिए मुला नसीरुद्दीन के पास कोई सामान्य था उसे तो सिर्फ शहर में दाखिल होने का टैक्स अदा करना था

अधिकारी ने पूछा, तुम कहां से आए हो और आने का सबब क्या है?

मुहर्रिर ने सिंह से भरी शाही में की कलम दुबई और मुला नसीरुद्दीन का बयान दर्ज करने के लिए तैयार हो गया।

मुला नसीरुद्दीन ने बताया, हुजूरे आला मैं इरान से आया हूं बुखारा में मेरे को संबंधी रहते हैं उन्हीं से मिलने आया हूं।

यह सुनकर अधिकारी ने कहा अच्छा तो तुम अपने संबंधियों से मिलने आए हो तुम्हें मिलने वालों का कर अदा करना पड़ेगा।

लेकिन हुजूर मैं उनसे मिलूंगा नहीं मुरला नसीरुद्दीन ने कहा मैं तो एक जरूरी काम से यहां आया हूं।

काम से आए हो अधिकारी चिका उसकी आंखों में चमक उभर आई इसका मतलब है कि तुम अपने रिश्तेदारों से भी मिलोगे और काम भी निपट आओगे।

तुम्हें दोनों कर अदा करने पड़ेंगे मिलने वालों का भी और काम का भी इसके अलावा उस अल्लाह के समान में मस्जिदों की अराइज के लिए अतिया अदा करो जिस अल्लाह ने रास्ते में डकैतों से तुम्हारी हिफाजत की।

म***** नसरुद्दीन ने सोचा मैं चाहता था कि वह अल्लाह इस समय मेरी इन मुक्त गौरव से हिफाजत करता डकैतों से बचाता तो मैं खुद कर लेता लेकिन वह खामोशी रहा क्योंकि उसे मालूम था कि इस बातचीत के प्रत्येक शब्द का मूल्य उसे 10 टन के देकर चुकाना पड़ेगा।

उसने चुपचाप अपनी आंटी में से थैली निकालकर शहर में दाखिले का रिश्तेदारों का व्यापार का तथा मस्जिदों के निर्माण का कर अदा किया सिपाही इस फिराक में आगे को झुक झुक कर देख रहे थे कि देखें इसके पास कितनी रकम और है।

मगर जब कार्य अधिकारी ने उन्हें सख्त निगाह से गोरा तो वे पीछे हट गए मुहर्रिर की नेजे की कलम तेजी से रजिस्टर पर चल रही थी।

कन्नदा करने के बाद भी नसरुद्दीन की थैली में कुछ तन के बच गए थे कर अधिकारी की आंखों में वेतन के खटक रहे थे और वह तेजी से सोच रहा था कि वह टंकी भी इससे कैसे हटाए जाए।

कर अदा करने के बाद मुला नसरुदीन चलने को हुआ तो अधिकारी चिल्लाया ठहरो म***** नसरुद्दीन पलट कर उसका चेहरा देखने लगा।

इस गधे का कर कौन अदा करेगा यदि तुम अपने रिश्तेदारों से मिलने आए हो तो जाहिर है कि तुम्हारा घटा भी अपने रिश्तेदारों से मिलेगा इसका कर वादा करो।

म***** नसरुद्दीन ने फिर अपनी थैली का मुंह खुला और बड़ी ही नम्रता से बोला मेरे आका आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है हकीकत में बुखारा में मेरे गधे के संबंधियों की तादाद बहुत ज्यादा है वरना जैसे यहां काम चल रहा है उसे देखते हुए तो तुम्हारे अमीर बहुत पहले ही तख्त से उतार दिए गए होते और मेरे हुजूर आप अपने लालच की वजह से ना जाने कब के बस सूली पर चढ़ा दिए गए होते।

इससे पहले कि कर अधिकारी उसकी बात का अर्थ समझ पाता मुला नसरुदीन उछलकर अपने गधे पर बैठा और उसे ऐड लगाकर सरपट दौड़ता हुआ एक गली में जा घुसा वह लगातार अपने गधे का हौसला बढ़ाते हुए कह रहा था और तेज और तेज मेरे वफादार दोस्त जल्दी भाग वरना तेरे इस मालिक को एक और कर अपना यह सिर देकर चुकाना पड़ेगा और तेज मेरे वफादार गधे और तेज।

मुला नसीरुद्दीन किस्सा पार्ट फोर्थ

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उसे अपने बुखारा की ऊंची ऊंची मीनार ए चौराहा का है खेत गांव और रेगिस्तान को भी आ जाते थे उसे पता चल चुका था कि पुराना अमीर गारत हो चुका है लेकिन उसके बाद बनाना या अमीर उससे भी काया और संगदिल था।

इस नए अमीर ने पहले अमीर से भी ज्यादा आवाम पर जुल्मों सितम ढा रखे थे आवाम को तरह-तरह की चुंगी लगाकर लूटा जा रहा था वैसे नया अमीर बड़ा ही धार्मिक था वह साल में दो बार से बहाउद्दीन की पवित्र दरगाह पर सजदा करने जाता था।

जो बुखारा शहर के पास ही थी लूट का सूट पूरे जोरों पर थी खेत खलियान शूकर जल चुके थे धरती में दरारें पड़ गई थी और दस्त कार्य समाप्त हो चुकी थी और व्यापार लगातार घटता जा रहा था।

खुला नसीरुद्दीन ने सोचते सोचते एक गहरी सांस ली और करवट बदल कल फिर अपनी सोचो में गुम हो गया सुबह की अजान के साथ ही पूरा कारवां उठ गया उठ वालों ने समान हो तो पर लगना शुरू कर दिया सौदागर अपनी पगड़ी या दुरस्त करने लगे।

नसीरुद्दीन भी उठा सबसे पहले अपनी आंटी में खून से थैली टटोली वह सलामत थी फिर अपने गधे के करीब आकर उसकी पीठ पर हाथ फेरा है मेरे वफादार गधे चल अपने मुल्क में दाखिल होने का मुबारक वक्त आ गया है।

फोटो के गले की घंटियां पर झूठे और कारवां फाटक की ओर बढ़ गया फाटक में दाखिल होते ही सब एक और रुक गए।

पूरी सड़क पहरेदार ओने गिरी हुई थी सिपाहियों की तादाद भी काफी थी कुछ तो कायदे से वर्दियां पहने थे मगर कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें वर्दी पहनने का तरीका तक नेताओं अमीर की नौकरी में अभी भी नहीं थे और उन्हें रिश्वतखोरी का पूरा मौका नहीं मिला था ।

वह चीख चिल्ला रहे थे उस लूट के लिए लड़ाई झगड़ा और धक्का-मुक्की कर रहे थे जो उन्हें वापारी उसे हासिल होने वाली थी।

फाटक के करीबी एक चाय की दुकान थी वर्दी पहने अफसर सा दिखाई देने वाला एक कुंडीयिल व्यक्ति बाहर आया उसके पैरों में जूतियां थी उसके मोटे और फूल खिले चेहरे पर आईआरसी अधिकारी और जलालत के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।

उसने एक ललचाए नजर से व्यापारियों की ओर देखा फिर बोला यशोदा करो बुखारा में तुम्हारा स्वागत है खुदा करे तुम्हें अपने काम में अपने इरादों में कामयाबी हासिल हो ए व्यापारियों आपको यह इल्म होना चाहिए कि अमीर का हुक्म है कि जो सौदागर अपने माल का मामूली सा हिस्सा भी छिपाने की कोशिश करेगा उसे बेच लगा लगा कर मार डाला जाएगा।

यह सुनकर व्यापारी कुछ विचलित हुए और परेशानी की हालत में रंगी दानिया से लाने लगे कर अधिकारी बड़ी मशक्कत के बाद पहरेदार ओं की ओर पलट कर बोला ए बुखारा के वफादार ओ अपना काम शुरू करो।

आदेश पाते सिपाही चीखते चिल्लाते होठों पर झपट पड़े वे खुशी से चीख चिल्ला रहे थे जैसे किसी लूट में शरीक हो रहे हो और अधिक से अधिक माल एक दूसरे से पहले लूट लेना चाहते हो।

सन के मोटे मोटे रस से उन्होंने अपनी तलवारों से काट डाले और देखते ही देखते सम्मान की काठी रोल वाली सड़क पर कीमती सामान बिखरा दिखाई देने लगा इसमें कीमती कपड़ों के थान चाय काली मिर्च कपूर गुलाब के इत्र की शीशी या तथा तिब्बती औषधियों के डिब्बे थे।

व्यापारी बेबस से खड़े सिपाहियों की लूट का सूट देख रहे थे जिसके मन में जो आ रहा था वह दूसरे की नजर बचाकर अपनी जेब के हवाले कर रहा था केवल दो घड़ी,

यह सिलसिला केवल दो घड़ी चला फिर सभी सिपाही कर अधिकारी के पीछे जाकर खड़े हो गए लूट के माल से भरी उनकी जेबीटी जा रही थी फिर शुरू हुई शहर में आने और सामान लाने की वसूली।

यह कहानी यही पूरी होती है और और मुला नसीरुद्दीन की अगली कहानी में फिर से मुलाकात होगी धन्यवाद।

मुला नसीरुद्दीन किस्सा पार्ट थर्ड

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तमाम शहरों से उसे आसमान और आसमान पर टिमटिमाते हुए सितारे एक ही जैसे लगते थे वही गहरा और खामोश आसमान और वही टिम टिम करते जाने पहचाने सितारे।

दुनिया भर के शहरों में सरहद ने आकर जो गहरी गहरी अपने पराए की खाई को दी हुई है ऐसा कुछ भी आसमान और उसके सितारों के दरमियान उसमें कभी महसूस ना किया था।

उसे हमेशा यही लगता कि रातों की शांत व पवित्र दुआओं की आवाजें उसे बड़े धनवान उसे भी धनवान बना देती थी और आखिर वह खुद को धनवान महसूस करें भी क्यों नहीं उसे वह सब कुछ हासिल था जो दुनिया के बड़े-बड़े देशों को भी हासिल न था।

इस दुनिया में हर आदमी का अपना अपना नसीब होता है भले ही अमीर लोग सोने चांदी के बर्तनों में खाना खाए लेकिन वे अपनी सभी रातें छत के नीचे गुजारने को ही मजबूर है इस तरह मुला नसरुदीन की तरह शरद और सितारे भरे आसमान को निहारते हुए और कल्पना की उड़ान भरते हुए अमीर लोग भी सोचने का मौका नहीं जुटा सकते ऐसा उन विचारों का नसीब कहां जो उन्हें इस तरह की सहूलियत मिल सके।

एकजुट होकर नमाज़ अदा करते लोग अपनी इबादत पूरी करके अपने अपने खेतों में भोजन की व्यवस्था में जुट गए।

चारदीवारी के बाहर बड़े-बड़े कल आंखों के नीचे आग जलने लगी जी भर के लिए तैयार बैठे और बकरियां बुरी तेरे मिठाइयां उठी खड़ा हो के नीचे जलती आग में घूमते हुए मसालों की गंध हवा में बिखेर दी।

मुला नसीरुद्दीन हवा के रुख को पहचान कर उस जगह पर जा लेटा जहां पर यह भूख जगाने वाली खाने के गंद में पहुंच सके।

तारों को निहारता हुआ वह सोच रहा था कि कल जब वह बुखारा शहर में प्रवेश करेगा तो उसे फाटक पर ही चुंगी अदा करनी पड़ेगी हालांकि उसे बुखार आ छोड़े 10 बरस बीत चुके थे मगर अभी तक उसे बुखार आ के सभी रिवाजों की पूरी जानकारी थी उसने यही सोचकर अपनी रकम का आखिरी हिस्सा बचा कर रख छोड़ा था।

वह दुनिया के भले ही किसी भी मुल्क में रहा हो उसे अपने बुखारा की ओर बुखारा के रीति-रिवाजों की हमेशा याद आती रहती लेटा लेटा हुआ है अपने प्यारे वतन की याद में खोया।

उसने अपने वतन से भेज प्यार था धूप से तपेश रामबाई चेहरे पर काली दाढ़ी और साफ-सफाई आंखों वाला खुशमिजाज मुला नसीरुद्दीन तेल की चिकनाई से शनि पकड़ी पर बंद लगे कोर्ट और फटे जूते पहन ने अपने वतन से इतनी दूर होता वतन के लिए उसके दिल में उतना ही प्यार उमड़ता।

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मुला नसीरुद्दीन किस्सा पार्ट सेकंड

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काफिले के पीछे चल रहा मुला नसीरुद्दीन हालांकि कर दो बार में पूरी तरह लथपथ हो चुका था मगर फिर भी वह खुश था इस धूल मिट्टी से उसे सोंधी सोंधी खुशबू आती महसूस हो रही थी आखिर यह मिट्टी उसके अपने प्यारे वतन बुखारा की थी।

काफिला जिस वक्त शहर की चारदीवारी के करीब पहुंचा फाटक पर तैनात पहरेदार फाटक बंद कर रहे थे काफी लेकर सरदार ने दूर से ही मोहरों से भरी थैली ऊपर उठाते हुए चिल्लाकर पहरेदार ओ से कहा खुदा के वास्ते रुको हमारा इंतजार करो

हवा की साईं साईं और घंटियों की गन गन आहट में पहरेदार उनकी आवाज ना सुन सके और हौसला होने के कारण उन्हें मोहरों से भरी थैली भी दिखाई नदी फाटक बंद कर दिए गए अंदर से मोटी मोटी साथ ले लगा दी गई और पहरेदार ब** जिओ पर चढ़कर तोपों पर तैनात हो गए।

धीरे-धीरे अंधेरा फैलना शुरु हो गया था हवा में तेजी के साथ साथ कुछ ठंडक भी बढ़ने लगी थी आसमान पर सितारों की टीम टीम आहट के बीच दूज का चांद चमकने लगा था

सरदार ने काफिले को वही चारदीवारी के पास ही डेरा डालने का हुक्म दे दिया बुखारा शहर की मस्जिदों की ऊंची ऊंची मीनारों से जुट फूटे कि उस खामोशी में अजान की तेज तेज आवाजें आने लगी अजान की आवाज सुनकर काफिले के सभी लोग नमाज के लिए इकट्ठा होने लगे मगर मुला नसीरुद्दीन अपने गधे के साथ एक और को खिसक लिया।

वह अपने गधे के साथ चलते हुए कहने लगा ए मेरे प्यारे गधे काफिले के इन लोगों को तो खुदा ने सब कुछ पता किया है जिसके लिए यह व्यापारी नमाज पढ़कर खुदा का शुक्रिया अदा कर रहे हैं यह लोग शाम का खाना खा चुके हैं और अभी थोड़ी देर बाद रात का खाना खाएंगे मेरे वफादार गधे मैं और तू तो अभी भूखे हैं हमें ना तो शाम का खाना मिला है और ना ही अभी रात को मिलेगा।

हम किस चीज के लिए खुदा का शुक्रिया अदा करें अगर अल्लाह हमारा शुक्रिया चाहता है तो मेरे लिए पुलाव की तश्तरी और तेरे लिए एक गठियावाला घास भिजवा दे।

काफिले से काफी दूर आकर उसने अपने गधे को पगडंडी के किनारे एक पेड़ से बांध दिया और काशी एक पत्थर अपने सिरहाने रखकर नंगी जमीन पर ही लेट गया ऊपर टिमटिमाते सितारे भरे आसमान पर उसकी नजर टिक गई आसमान में टिमटिमाते सितारों का जलसा भुना हुआ था।

अक्सर बाय इन सितारों को निहारता रहता था कभी बगदाद से कभी इस्तांबूल से कभी दमिश्क से तो कभी तेहरान से।

मुला नसीरुद्दीन किस्सा पार्ट फर्स्ट

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सूरज का गोला पश्चिम की पहाड़ियों के पीछे छुप गया था सूरज छिपने के बाद मशरीक मगरिब सोमवार और जुनून में फैली सुर्खी भी धीरे-धीरे चमकने लगी थी फिजा में ऊंटों के गले में बंधी घंटी की धड़कन आहट गूंज रही थी

एक काफिला बड़ी तेजी के साथ बुखारा शहर की तरफ जा रहा था काफिले में सबसे पीछे एक गधे पर सवार जो शख्स था वह घर दो गुबार में इस तरह लथपथ हो चुका था कि उसके तमाम बदन पर गर्द की एक मोटी परत जम चुकी थी जिससे उसका चेहरा तक पहचान में नहीं आता था

दिन हिन हालत में काफिले के पीछे गधे पर सवार चला आ रहा है यह शख्स कोई और नहीं मिला नसीरुद्दीन था

बुखारा का मनमौजी फक्कड़ इंसान यतीम और गरीबों का सहारा सुखद खोरो और जबरन टैक्स वसूल करने वालों का कट्टर दुश्मन और बुखारा के अमीर की आंखों में चुभने वाला काटा था

मुला नसरुदीन अपने वफादार गधे के साथ शहर दर शहर खाक जानते हुए वह 10 बरस से अपने महादेव वतन बुखारा से दूर रहा था लेकिन उसकी आंखों में हमेशा अपने वतन के मजलूम लोगों की चीख-पुकार अमीर उमराव के जुलम घूमते रहते थे

इन 10 वर्षों में वह बगदाद इस्तांबुल बक्शी बक्शी सराय तेहरान तितली मेज और 10 मित्र जैसे सभी मुल्कों में घूम आया था वह जहां भी जाता गरीबों का मुहाफिज और जुल्म करने वाले आमिर उमराव का दुश्मन बन जाता वह गरीबों और यह तीनों के दिलों में कभी न बुलाए जाने वाली यादें और जुलम के आरोप कारों के दिलों में खौफ के साए छोड़ जाता

अब वह अपने प्यारे वतन बुखार आ लौट रहा था ताकि वर्षों से भटकती अपनी जिंदगी को वह कुछ और चैन सुकून भरे ठहराव के पल दे सके।

दोस्तों यह कहानी बहुत पुरानी है ऐसी मैं आपके लिए और भी कहानी लेकर आऊंगा तो खूब पढ़ते रहिए और हंसते रहिए मजे लेते रहिए धन्यवाद

Providence (परमात्मा)

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God tells ram Hanuman ji.

The living organisms you see in all animals, it is the image of God.

Do not see the reflection 🪞 of the sky in every lake or Sarita.

God is stable sky. It does not have a reflection.

Just as the power of the sky is.in the same way .

The supreme brahma supreme is the only truth.

All visible mind is its are my reflection.

I am divine and you are my reflection.

I have just fold you the jisms great knowledge element,

Do not ever reveal him in those people who do not have faith in me.

Even if I do not give you a empire in return.

There is no more preaching than this that I can offer you.

Jai shri ram,

श्री राम हनुमान को बताते हैं,

तुम समस्त प्राणियों में जिस जो आत्मा को देखते हो वह परमात्मा का ही प्रतिबिंब है

क्या तुम पड़ती है एक सरोवर या सरिता में आकाश को ही प्रतिबिंबित नहीं देखते

परमात्मा स्थिर आकाश है इसके प्रतिबिंब शाश्वत नहीं है

जिस प्रकार मात्र आकाश की सत्ता है उसी प्रकार परम ब्रह्म परमात्मा ही एकमात्र सत्य है

समस्त दृश्य मान वस्तुएं इसके ही प्रतिबिंब है

मैं परमात्मा हूं और तुम मेरे प्रतिबिंब हो मैंने अभी तुम्हें जिस महान तथ्य को बताया है उसे उन लोगों में कभी प्रकट मत करना,

जिनकी मुझ पर भक्ति नहीं है भले ही वह तुम्हें इसके बदले में एक साम्राज्य ही क्यों ना दे दे।

इससे बढ़कर और कोई उपदेश नहीं है जो मैं तुम्हें प्रदान कर सकता हूं।

जय श्री राम,

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Water (पानी)

Water(पानी)

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Never misuse water, save water, save world

Make every drop count!

A drop of water is worth more than a sack of gold to to a trustee man.

Please don’t waste water,

Turn off water when not in use.

There are a number of ways to save water and they all start with you.

Save water it will save you later

When you conserve water,

You conserve life.

Thank you,

पानी का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए

पानी बचाओ संसार बचाओ

हर बूंद की गणना करो

पानी की एक बूंद एक पैसे आदमी के लिए सोने की 1 बोरी से अधिक मूल्यवान होती है

कृपया पानी बर्बाद मत करो,

उपयोग न होने पर पानी बंद कर दें।

आपके साथ शुरू होने वाले पानी को बचाने के कई तरीके हैं

पानी बचाओ यह आपको बाद में बचाएगा

जब आप पानी की रक्षा करते हैं तो यह आपके जीवन की रक्षा करेगा

धन्यवाद,